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‘एक मुख्यमंत्री जो कह सकता है उसे अदालत कैसे नियंत्रित कर सकती है?’ करूर भगदड़ मामले में SC ने DMK की याचिका खारिज की

'एक मुख्यमंत्री जो कह सकता है उसे अदालत कैसे नियंत्रित कर सकती है?' करूर भगदड़ मामले में SC ने DMK की याचिका खारिज की
करूर में पिछले साल सितंबर में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान भगदड़ मची थी, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय और मंत्री आधव अर्जुन सहित तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) के नेताओं को करूर भगदड़ मामले पर सार्वजनिक बयान देने से रोकने की मांग की गई थी।याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि ‘न्यायिक मंच का इस्तेमाल राजनीतिक मंच के तौर पर नहीं किया जा सकता.’अदालत ने कहा कि एक मुख्यमंत्री को क्या बात करनी चाहिए या क्या नहीं, इस पर कोई अदालत कैसे नियंत्रण कर सकती है।अदालत ने करूर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों से मुख्यमंत्री की प्रस्तावित यात्रा पर सवाल उठाने के लिए द्रमुक की भी खिंचाई की।डीएमके सचिव आरएस भारती की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हुज़ेफ़ा अहमदी ने न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष सोमवार को तत्काल सुनवाई के लिए मामले का उल्लेख किया था। पीठ ने अनुरोध स्वीकार करते हुए मंगलवार को याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी.द्रमुक ने तर्क दिया था कि मुख्यमंत्री विजय की 10 जुलाई को पीड़ित परिवारों से मिलने की निर्धारित यात्रा चल रही जांच में गवाहों को प्रभावित कर सकती है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि विजय ने अक्टूबर 2025 में मारे गए लोगों के परिवारों को 20-20 लाख रुपये और घायलों को 2-2 लाख रुपये बांटे, जबकि आपराधिक कार्यवाही लंबित थी।आवेदन में मंत्री आधव अर्जुन, जो इस मामले में भी आरोपी हैं, द्वारा कथित तौर पर 2 जुलाई, 2026 को दिए गए एक सार्वजनिक बयान पर आपत्ति जताई गई है।करूर में पिछले साल सितंबर में एक रैली के दौरान भगदड़ मची थी, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।

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