‘राष्ट्र प्रथम’ के विचार के लिए हमारे इतिहास की ईमानदार समझ की आवश्यकता है: नितिन गडकरी

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी मंगलवार को कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम’ का विचार नारों से परे है और इसके लिए हमारे इतिहास की ईमानदार समझ, प्रणालीगत अंतराल की पहचान और भविष्य की क्षमताओं के निर्माण की आवश्यकता है।उन्होंने कहा, “आधुनिकीकरण सभ्यतागत आत्मविश्वास में निहित होना चाहिए, न कि अंधानुकरण में। राष्ट्र प्रथम का मेरा विचार सार्थक रूप से राष्ट्रीय विमर्श को समृद्ध करता है।”केंद्रीय मंत्री नई दिल्ली में ‘माई आइडिया ऑफ नेशन फर्स्ट: रिडिफाइनिंग अनअलॉयड नेशनलिज्म’ पुस्तक के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे।इस कार्यक्रम में भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल वीजी खंडारे भी शामिल हुए।लेखक उदय माहुरकर ने कहा कि उनकी पुस्तक में व्यक्तित्वों का महिमामंडन या निंदा नहीं की गई है, बल्कि राष्ट्रीय हित के नजरिए से विचारों और निर्णयों का मूल्यांकन किया गया है।उन्होंने कहा, “एक मजबूत राष्ट्र अपने अतीत के साथ खुले तौर पर जुड़ता है। नेशन फर्स्ट का मेरा विचार सत्य, सांस्कृतिक निरंतरता और जिम्मेदारी पर आधारित राष्ट्रवाद की एक स्पष्ट परिभाषा पेश करता है, जो पाठकों को विकृतियों से परे भारत की एकता और सभ्यतागत ताकत को समझने में मदद करता है।”
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